5 अक्टूबर 2019 - 12:40
आयत क्या कहती है? सभी समस्याओं की जड़ या तो कुफ़्र व अनेकेश्वरवाद है या फिर ईश्वर को भूल जाना है।

जो अपने कार्यों में ईश्वर को दृष्टिगत नहीं रखता उसे पाप करने में कोई भय नहीं होता और वह स्वयं, अपने परिवार व समाज को अपने ग़लत कार्यों के कुपरिणामों में ग्रस्त कर देता है।

सूरए रूम की आयत क्रमांक 41 व 42 का अनुवादः

लोगों ने जो काम किए उसके कारण थल और जल में बुराई उजागर हो गई ताकि (ईश्वर) उन्हें उनकी कुछ करतूतों का मज़ा चखाए, शायद वे (सत्य की ओर) लौट आएँ। (हे पैग़म्बर! उनसे) कह दीजिए कि धरती में घूम फिर कर देखो कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ जो पहले गुज़रे है। उनमें अधिकतर अनेकेश्वरवादी थे।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

क़ुरआने मजीद, अनेकेश्वरवाद को सभी पापों व बुराइयों की जड़ कहता है ताकि यह बता सके कि अनेकेश्वरवाद तबाही व बर्बादी का कारण है और जो चीज़ मनुष्य

के वास्तविक कल्याण व शांति का कारण है वह एकेश्वरवाद और अनन्य ईश्वर की बंदगी है।

 

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. मनुष्य के बुरे व ग़लत कर्म, प्राकृतिक व्यवस्था पर प्रभाव डालते हैं और प्राकृतिक आपदाओं में उनकी भूमिका है।
  2. पर्यावरण में बिगाड़, मनुष्य के विध्वंसक क्रियाकलाप के कारण है।

  3. पर्यावरण, चाहे वह थल में हो या जल में हो, मनुष्य के हाथ में ईश्वर की अमानत है।

  4. सैर, सफ़र और भ्रमण अगर पाठ सीखने के लिए हो तो इस्लाम ने उसकी सिफ़ारिश की है।

  5. अगर किसी समाज के अधिकतर लोग, पथभ्रष्टता व बुराई में ग्रस्त हो जाएं तो वह समाज ईश्वरीय दंड में ग्रस्त हो जाता है और वहां से पलायन कर जाना चाहिए।